Curb your ego | अपने अहंकार पर अंकुश लगाएं {2021}
बहुत सारे धर्म गुरुओं ने हिंसा से निपटने के लिए नए धर्म बनाए। लेकिन इनसे कोई फायदा नहीं हुआ। जब ये धर्म बनते थे, तो ये धर्म नहीं हुआ करते थे। ये हिंसा और जातिवाद से निपटने के moments हुआ करते थे। लेकिन आने वाले समय के साथ लोग इन moments को धर्म की तरह अपनाने लगते थे, जिससे जातिवाद और हिंसा और भी ज़्यादा बढने लगती थी। इतिहास में बुद्ध और महावीर जैसे लोगों ने हिंसा को रोकने की बहुत कोशिश की। समय के साथ हम उन्हें भगवान की तरह पूजने लगे। लेकिन इनकी दी हुई शिक्षा को हम भूल गए।
आखिर ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ये moments धर्म बन जाते हैं और लोगों में हिंसा बढ़ा देते हैं। जब इन मोमेंट की बागडोर दूसरों के हाथ में आती थी तो वे इन मोमेंट में कुछ ऐसी बातें लागू कर देते थे जिनका मोमेंट से कोई लेना देना नहीं होता था। समय के साथ ये मोमेंट अपना अर्थ खोने लगे। जैसे-जैसे हम तरक्क़ी की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे हिंसा बढ़ती जा रही है। जिन धर्मों ने हमें भाईचारे से रहने का उपदेश दिया आज उन्हीं के नाम पर दंगे हो रहे हैं। धर्म हिंसा से निपटने में नाकामयाब रहा।
इस लेख में हम देखेंगे कि हमारी सारी परेशानियों की वज़ह क्या है और कैसे हम इन सब से छुटकारा पा सकते हैं। यह लेख उन लोगों के लिए है जो दुःख से छुटकारा पाना चाहते हैं, जो हिंसा को रोक कर समाज में शांति लाना चाहते हैं और जो हमेशा past या future के बारे में सोचते रहते हैं। हम जानेंगे कि कैसे ego की वज़ह से लोग हमेशा परेशान रहते हैं और किस तरह वर्तमान में रहकर आप अपनी सभी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।
अपने सभी दुखों की वजह ख़ुद इंसान ही है। पिछले सौ साल से इंसान ने बहुत सारे बम और ज़हरीली गैसें बनाई हैं, जिनसे सिर्फ़ इंसान का ही नुक़सान हुआ है। इंसान के इन्हीं आविशकारों की वजह से आज पूरी दुनिया में आतंक फैला हुआ है और सभी लोग डरे हुए हैं। सभी धर्म हमें शांति से रहने का उपदेश देते हैं। पर इन धर्मों की वज़ह से ही हमारे समाज में अशांति फैली हुई है।
सारे दर्द और सभी परेशानियों को ढोते रहना ही ego का काम है। अपने ego को छोडकर ख़ुद पर काबू पाना सीखें। आइए हम समझने की कोशिश करते हैं कि ईगो किस तरह हमें परेशान करता है। एक बार एक अंधी बूढ़ी महिला जंगल में रास्ता भटक गई। दो साधुओं ने उस बेचारी महिला को देखा। उनमें से एक साधू ने उस बूढ़ी महिला का घर पूछा और उसे अपनी गोद में उठाकर उसके घर तक ले गया। यह बात दूसरे साधू को अच्छी नहीं लगी। इस घटना के कुछ घंटे बाद दूसरे साधू ने कहा, “आपने जो किया वह हम साधुओं को शोभा नहीं देता।” तो उस पर पहले साधू ने कहा, “मैंने तो उस महिला को कई घंटों पहले ही उतार दिया, लेकिन आप उसे अब भी उठाए हुए हैं।”
तो इस तरह ही ego आपको कभी भी वर्तमान में नहीं रहने देता। ये आपके दिमाग़ को हमेशा पुरानी बातों को सोचने पर मजबूर करता है, जिससे आपकी बेचैनी, उत्सुकता और परेशानी बढ़ती रहती हैं और आपका दर्द और बढ जाता है। अगर कभी आपका किसी से झगड़ा हुआ हो तो आप उस बात को कई दिन तक याद करते रहते हैं और अपने ख्यालों में ही उस इंसान को बार-बार मारते रहते हैं। क्या इससे आपको सुकून मिलता है? नहीं, बल्कि आप और भी ज़्यादा बेचैन हो जाते हैं। इसलिए हमें कभी भी पुरानी बातों को याद नहीं करना चाहिए। अगर आप के साथ कुछ अच्छा नहीं हुआ तो आप उस बात को वहीं पर छोड़ दें और आगे बढ जाएँ।
बुरी यादों को कभी भी अपने साथ ना रखें। दुनिया भर के अलग-अलग धर्मों में दुख की अलग-अलग परिभाषाएँ दी गई है। बौध धर्म के गुरुओं ने बताया कि ये दुनिया दुखों से भडी पड़ी है और सभी दुखों का एक ही कारण है ‘इच्छा’। जैन धर्म के तीर्थकरों ने दुख जैसे दूसरी भावनाओं से छुटकारा पाने के लिए इस दुनिया कि सभी चीज़ों से नाता तोड़ लिया। क्रिश्चन धर्म में पाप को परिभाषित किया गया है। उसमें कहा गया है कि इंसान होने के कर्तव्य भूलना ही सबसे बडा पाप है। इस्लाम कहता है कि एक मासूम इंसान की हत्या करना पूरी मानवता की हत्या है।
सभी धर्मों ने लगभग एक ही संदेश दिए हैं। लेकिन अब तक कोई भी धर्म हिंसा को रोक पाने में सक्षम नहीं हो पाया। तो आख़िर हम हिंसा से छुटकारा कैसे पाएँ? हिंसा रोकने से पहले हमें हिंसा कि वजह को जानना होगा। हिंसा की एक बहुत बड़ी वजह है हमारा ego. वह हमें कभी भी शांति से बैठने नहीं देता। Ego को past और future में रहना पसंद है। ये हमेशा बीती बातों को सोचता रहता है और अगर आपको अपने परेशानी से छुटकारा पाना है तो आपको अपने ego से छुटकारा पाना होगा।
Ego से छुटकारा पाना कोई आसान काम नहीं है। पुरानी यादें और भविष्य की चिंताओं को लेकर चलने से ही आपकी परेशानियाँ बढ़ती हैं। आज अक्सर हमारा आमना-सामना ऐसे लोगों से होता है जो हमेशा ही परेशान रहते हैं। अगर वह लोग अपना घमंड, ख़्वाहिश और ego को छोड़ते हैं तो उनकी सारी परेशानियाँ ख़त्म हो जाएंगी। Ego की वजह से हमारे सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती है। हम गुस्से में कुछ ऐसा काम कर बैठते हैं जिसका हमें बाद में अफ़सोस होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अपने आप को नहीं जानते, हम अपने आप को रोक नहीं पाते हैं। हम अपने ही ख्यालों में उलझे रहते हैं और उसे काबू नहीं कर पाते।
अगर आप संतुष्टि पाना चाहते हैं तो आपको अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना होगा। आपकी ज़िन्दगी का असली मकसद है क्या? क्या आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी बनना चाहते हैं? इसका मतलब आप चाहते हैं कि आप से अमीर कोई ना हो। आप सबसे अमीर रहने के लिए हमेशा ही परेशान रहेंगे और दूसरों से competition करते रहेंगे। क्या आप समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं? इसका मतलब है कि आप समाज में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। आप अपने आप को देखना चाहते हैं कि आप औरौ से अच्छे हैं। क्या आप खुशहाल परिवार पाना चाहते हैं? ज़रूरी नहीं है कि आपका परिवार आपके हिसाब से ही रहे है और आपकी बातों को माने। घर में झगडे होते रहते हैं जोकि आपकी परेशानी की वज़ह बन सकती है।
तो इन सब से एक बात साफ़ है कि अगर आप कुछ हासिल करना चाहते हैं तो वह ना मिलने पर आपको तकलीफ होती है और हमेशा परेशान रहेंगे। हम सभी की बाहरी ज़रूरतें भले ही अलग-अलग हों, पर अन्दर की ज़रूरतें एक जैसे ही हैं। हम सभी खुश रहना चाहते हैं और सुकून से अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहते हैं। आपको ये जानना होगा कि सोच में होने और होश में होने में बहुत अंतर है।
अगर आप होश में हैं तो आप वर्तमान में रहेंगे। लेकिन अगर आप सोच में है तो आप या तो भविष्य के बारे में सोच रहे हैं या भूत के बारे में। सबसे पहले तो आपको वर्तमान में रहना सीखना होगा। अगर आप वर्तमान में रहते हैं तो आप अपने आप ही खुश रहेंगे। वर्तमान में रहने का मतलब है आप के पास जो कुछ भी है उसे स्वीकार करें। अगर आप हमेशा किसी चीज़ की शिकायत करते रहेंगे तो आप हमेशा ही कुछ-न-कुछ पाने के लिए परेशान रहेंगे और वर्तमान में नहीं जी पाएंगे।
आज हर कोई सफलता पाना चाहता है। उन्हें लगता है कि इंसान अपनी सफलता से जाना जाता है। इसी सफलता को पाने के लिए इंसान हमेशा परेशान रहता है और इसके पीछे भागता रहता है। आपको जिस भी चीज़ में ख़ुशी मिलती है आप वह करें। भले कि वह दूसरों के हिसाब से वह मज़ेदार ना हो। आप अपने आप को हर माहौल में आनंद लेने के लायक बनाएँ, जिससे आप हमेशा खुश रह सकें हैं। लेकिन फिर भी अगर आप जो कर रहे हैं उसमें आपको ख़ुशी नहीं मिल रही है तो आप वह काम छोड दें।
आप जितना ज़्यादा वर्तमान में रहेंगे आपके स्वीकार करने की क्षमता उतनी ही बढ़ेगी। तो इस लेख से हमने सीखा है कि आज की इस भागदौड भरी ज़िन्दगी में हम इतने उलझे हुए हैं कि हम अपनी ज़रूरतों को पूरा करने केलिए ग़लत रास्तों को अपना रहे हैं। इसलिए आज दुनिया में हिंसा बढती जा रही है। इन सभी की शुरुआत ego से ही होती है। इसलिए ज़रूरी है कि हम ego से छुटकारा पाएँ।
ये बातें हमने A New Earth किताब से बताई है जिसके लेखक हैं Eckhart Tolle.
तो दोस्तों आशा करते हैं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। अगर पसंद आया तो एक टिप्पणी छोड़ दें।
धन्यवाद।
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| Curb your ego | अपने अहंकार पर अंकुश लगाएं {2021} |
आखिर ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ये moments धर्म बन जाते हैं और लोगों में हिंसा बढ़ा देते हैं। जब इन मोमेंट की बागडोर दूसरों के हाथ में आती थी तो वे इन मोमेंट में कुछ ऐसी बातें लागू कर देते थे जिनका मोमेंट से कोई लेना देना नहीं होता था। समय के साथ ये मोमेंट अपना अर्थ खोने लगे। जैसे-जैसे हम तरक्क़ी की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे हिंसा बढ़ती जा रही है। जिन धर्मों ने हमें भाईचारे से रहने का उपदेश दिया आज उन्हीं के नाम पर दंगे हो रहे हैं। धर्म हिंसा से निपटने में नाकामयाब रहा।
इस लेख में हम देखेंगे कि हमारी सारी परेशानियों की वज़ह क्या है और कैसे हम इन सब से छुटकारा पा सकते हैं। यह लेख उन लोगों के लिए है जो दुःख से छुटकारा पाना चाहते हैं, जो हिंसा को रोक कर समाज में शांति लाना चाहते हैं और जो हमेशा past या future के बारे में सोचते रहते हैं। हम जानेंगे कि कैसे ego की वज़ह से लोग हमेशा परेशान रहते हैं और किस तरह वर्तमान में रहकर आप अपनी सभी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।
अपने सभी दुखों की वजह ख़ुद इंसान ही है। पिछले सौ साल से इंसान ने बहुत सारे बम और ज़हरीली गैसें बनाई हैं, जिनसे सिर्फ़ इंसान का ही नुक़सान हुआ है। इंसान के इन्हीं आविशकारों की वजह से आज पूरी दुनिया में आतंक फैला हुआ है और सभी लोग डरे हुए हैं। सभी धर्म हमें शांति से रहने का उपदेश देते हैं। पर इन धर्मों की वज़ह से ही हमारे समाज में अशांति फैली हुई है।
सारे दर्द और सभी परेशानियों को ढोते रहना ही ego का काम है। अपने ego को छोडकर ख़ुद पर काबू पाना सीखें। आइए हम समझने की कोशिश करते हैं कि ईगो किस तरह हमें परेशान करता है। एक बार एक अंधी बूढ़ी महिला जंगल में रास्ता भटक गई। दो साधुओं ने उस बेचारी महिला को देखा। उनमें से एक साधू ने उस बूढ़ी महिला का घर पूछा और उसे अपनी गोद में उठाकर उसके घर तक ले गया। यह बात दूसरे साधू को अच्छी नहीं लगी। इस घटना के कुछ घंटे बाद दूसरे साधू ने कहा, “आपने जो किया वह हम साधुओं को शोभा नहीं देता।” तो उस पर पहले साधू ने कहा, “मैंने तो उस महिला को कई घंटों पहले ही उतार दिया, लेकिन आप उसे अब भी उठाए हुए हैं।”
तो इस तरह ही ego आपको कभी भी वर्तमान में नहीं रहने देता। ये आपके दिमाग़ को हमेशा पुरानी बातों को सोचने पर मजबूर करता है, जिससे आपकी बेचैनी, उत्सुकता और परेशानी बढ़ती रहती हैं और आपका दर्द और बढ जाता है। अगर कभी आपका किसी से झगड़ा हुआ हो तो आप उस बात को कई दिन तक याद करते रहते हैं और अपने ख्यालों में ही उस इंसान को बार-बार मारते रहते हैं। क्या इससे आपको सुकून मिलता है? नहीं, बल्कि आप और भी ज़्यादा बेचैन हो जाते हैं। इसलिए हमें कभी भी पुरानी बातों को याद नहीं करना चाहिए। अगर आप के साथ कुछ अच्छा नहीं हुआ तो आप उस बात को वहीं पर छोड़ दें और आगे बढ जाएँ।
बुरी यादों को कभी भी अपने साथ ना रखें। दुनिया भर के अलग-अलग धर्मों में दुख की अलग-अलग परिभाषाएँ दी गई है। बौध धर्म के गुरुओं ने बताया कि ये दुनिया दुखों से भडी पड़ी है और सभी दुखों का एक ही कारण है ‘इच्छा’। जैन धर्म के तीर्थकरों ने दुख जैसे दूसरी भावनाओं से छुटकारा पाने के लिए इस दुनिया कि सभी चीज़ों से नाता तोड़ लिया। क्रिश्चन धर्म में पाप को परिभाषित किया गया है। उसमें कहा गया है कि इंसान होने के कर्तव्य भूलना ही सबसे बडा पाप है। इस्लाम कहता है कि एक मासूम इंसान की हत्या करना पूरी मानवता की हत्या है।
सभी धर्मों ने लगभग एक ही संदेश दिए हैं। लेकिन अब तक कोई भी धर्म हिंसा को रोक पाने में सक्षम नहीं हो पाया। तो आख़िर हम हिंसा से छुटकारा कैसे पाएँ? हिंसा रोकने से पहले हमें हिंसा कि वजह को जानना होगा। हिंसा की एक बहुत बड़ी वजह है हमारा ego. वह हमें कभी भी शांति से बैठने नहीं देता। Ego को past और future में रहना पसंद है। ये हमेशा बीती बातों को सोचता रहता है और अगर आपको अपने परेशानी से छुटकारा पाना है तो आपको अपने ego से छुटकारा पाना होगा।
Ego से छुटकारा पाना कोई आसान काम नहीं है। पुरानी यादें और भविष्य की चिंताओं को लेकर चलने से ही आपकी परेशानियाँ बढ़ती हैं। आज अक्सर हमारा आमना-सामना ऐसे लोगों से होता है जो हमेशा ही परेशान रहते हैं। अगर वह लोग अपना घमंड, ख़्वाहिश और ego को छोड़ते हैं तो उनकी सारी परेशानियाँ ख़त्म हो जाएंगी। Ego की वजह से हमारे सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती है। हम गुस्से में कुछ ऐसा काम कर बैठते हैं जिसका हमें बाद में अफ़सोस होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अपने आप को नहीं जानते, हम अपने आप को रोक नहीं पाते हैं। हम अपने ही ख्यालों में उलझे रहते हैं और उसे काबू नहीं कर पाते।
अगर आप संतुष्टि पाना चाहते हैं तो आपको अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना होगा। आपकी ज़िन्दगी का असली मकसद है क्या? क्या आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी बनना चाहते हैं? इसका मतलब आप चाहते हैं कि आप से अमीर कोई ना हो। आप सबसे अमीर रहने के लिए हमेशा ही परेशान रहेंगे और दूसरों से competition करते रहेंगे। क्या आप समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं? इसका मतलब है कि आप समाज में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। आप अपने आप को देखना चाहते हैं कि आप औरौ से अच्छे हैं। क्या आप खुशहाल परिवार पाना चाहते हैं? ज़रूरी नहीं है कि आपका परिवार आपके हिसाब से ही रहे है और आपकी बातों को माने। घर में झगडे होते रहते हैं जोकि आपकी परेशानी की वज़ह बन सकती है।
तो इन सब से एक बात साफ़ है कि अगर आप कुछ हासिल करना चाहते हैं तो वह ना मिलने पर आपको तकलीफ होती है और हमेशा परेशान रहेंगे। हम सभी की बाहरी ज़रूरतें भले ही अलग-अलग हों, पर अन्दर की ज़रूरतें एक जैसे ही हैं। हम सभी खुश रहना चाहते हैं और सुकून से अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहते हैं। आपको ये जानना होगा कि सोच में होने और होश में होने में बहुत अंतर है।
अगर आप होश में हैं तो आप वर्तमान में रहेंगे। लेकिन अगर आप सोच में है तो आप या तो भविष्य के बारे में सोच रहे हैं या भूत के बारे में। सबसे पहले तो आपको वर्तमान में रहना सीखना होगा। अगर आप वर्तमान में रहते हैं तो आप अपने आप ही खुश रहेंगे। वर्तमान में रहने का मतलब है आप के पास जो कुछ भी है उसे स्वीकार करें। अगर आप हमेशा किसी चीज़ की शिकायत करते रहेंगे तो आप हमेशा ही कुछ-न-कुछ पाने के लिए परेशान रहेंगे और वर्तमान में नहीं जी पाएंगे।
आज हर कोई सफलता पाना चाहता है। उन्हें लगता है कि इंसान अपनी सफलता से जाना जाता है। इसी सफलता को पाने के लिए इंसान हमेशा परेशान रहता है और इसके पीछे भागता रहता है। आपको जिस भी चीज़ में ख़ुशी मिलती है आप वह करें। भले कि वह दूसरों के हिसाब से वह मज़ेदार ना हो। आप अपने आप को हर माहौल में आनंद लेने के लायक बनाएँ, जिससे आप हमेशा खुश रह सकें हैं। लेकिन फिर भी अगर आप जो कर रहे हैं उसमें आपको ख़ुशी नहीं मिल रही है तो आप वह काम छोड दें।
आप जितना ज़्यादा वर्तमान में रहेंगे आपके स्वीकार करने की क्षमता उतनी ही बढ़ेगी। तो इस लेख से हमने सीखा है कि आज की इस भागदौड भरी ज़िन्दगी में हम इतने उलझे हुए हैं कि हम अपनी ज़रूरतों को पूरा करने केलिए ग़लत रास्तों को अपना रहे हैं। इसलिए आज दुनिया में हिंसा बढती जा रही है। इन सभी की शुरुआत ego से ही होती है। इसलिए ज़रूरी है कि हम ego से छुटकारा पाएँ।
ये बातें हमने A New Earth किताब से बताई है जिसके लेखक हैं Eckhart Tolle.
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धन्यवाद।

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