Sources of income | इनकम के विभिन्न स्त्रोत {2021}
एक एवरेज मिडिल क्लास और एक अप्पर क्लास के व्यक्ति में क्या अंतर होता है? मिडिल क्लास वाले के पास कम पैसे होते हैं वही अप्पर क्लास वाले के पास ज़्यादा। पर आखिर ये अंतर पैदा कहाँ से होता है? लगभग हर बार ये अंतर आता है उनकी इनकम के स्त्रोत से। जहाँ एक मिडिल क्लास व्यक्ति के पास इनकम का एक ही सोर्स होता है वहीँ एक धनि इंसान के पास धन एक से ज़्यादा sources से आता है। पर एक से ज़्यादा sources of income को बनाने से पहले हमको ये बात पता तो होनी चाहिए की इनकम के sources क्या-क्या हो सकते हैं। इसलिए इस आर्टिकल में हम आपको 7 sources of income बताएँगे जिनसे एक एवरेज मिलियनेयर अपनी वेल्थ बनाता है।
इसके अलावा अंत में हम आपको कुछ तरीके बताएँगे जिससे आप भी घर बैठे इनमे से कुछ sources of income बना सकते हैं।
अर्जित आय-Earned income
सबसे पहली और सबसे आम सोर्स हैं earned income या अर्जित आय। एक एवरेज इंसान की mainly यही एक मात्रा सोर्स ऑफ़ इनकम होती है। जब आप कोई जॉब करते हैं, सैलरी लेते हैं, तब आप earned income से पैसे कमा रहे होते हैं। एक छोटे ओहदे के कर्मचारी से लेकर सीईओ लेवल के कर्मचारी तक सब earned income कमा रहे होते हैं। जी हाँ! सीईओ भी कंपनी का कर्मचारी ही होता है। स्वरोज़गार पेशेवर (self employed professionals) जैसे कि डॉक्टर्स, लॉयर्स और यहाँ तक की freelancers भी इसी वर्ग में आते हैं। earned income तब बनती है जब आप अपने वक्त के बदले में पैसे लेते हैं। इसलिए इसको एक्टिव इनकम (active income) भी कहा जाता है। क्योंकि जब तक आप सक्रिय रूप से काम करते हैं केवल तब तक आपके पास ये इनकम आती है। बड़े से बड़े millionaires भी अपनी शुरुआत एक्टिव इनकम से ही करते हैं, और शुरुआत करने के लिए ये एक अच्छा point भी होता है।
जब आपके पास अपना और अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिए कोई इनकम का माध्यम नहीं होता तब एक्टिव इनकम का सोर्स आप जल्दी से ढूँढ सकते हैं। पर अगर आप इसी वर्ग में लम्बे समय तक बने रहते हैं तब आपके लिए ये वर्ग खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि ये इनकम पूरी तरह से आपके टाइम पर निर्भर करती है जो कि आपके पास सीमित ही होता है। आपके पास भी दूसरों की तरह 24 घंटे होते हैं और इसलिए एक point पर आकर इस इनकम को बढ़ाया नहीं जा सकता। इसलिए शुरूआती दौर में तो earned income सही है पर कुछ समय बाद आपको दूसरे प्रकार की आय बनानी ज़रूरी होती है।
लाभ आय-Profit Income
इसके बाद आता है हमारा दूसरा टाइप-profit Income. ये इनकम तब आती है जब आप कोई भी वस्तु या सर्विस को manufacture कर के sale करते हैं। Manufacturing करने में जितना खर्चा आता है उससे ज़्यादा कीमत पर आप आपका प्रोडक्ट या सर्विस sell करते हैं जिससे मुनाफा होता है। इस स्टेज पर आकर आप एक कर्मचारी से एक व्यवसायी (entrepreneur) बन जाते हैं, क्योंकि अब आप नौकरी की जगह व्यापार कर रहे होते हैं। पहले के टाइम में एक बिज़नेस शुरू करना बहुत कठिन काम होता था क्योंकि इसमें बड़े स्तर का निवेश चाहिए होता था और हर किसी के पास निवेश करने के लिए पैसे नहीं होते थे।
पर इंटरनेट के आने के बाद से बहुत सारे काम बिना निवेश के भी शुरू करना संभव हो गया है। प्रॉफिट इनकम भी दो तरह की हो सकती है: एक्टिव इनकम और पैसिव इनकम (active income and passive income)। अगर आप उत्पाद (product) खुद अपने हाथों से manufacture कर रहे हैं तो ये एक एक्टिव इनकम होगी। इसमें भी आप जब तक काम कर रहे हैं तभी तक income आएगी। उदहारण के लिए हैंडीक्राफ्ट्स, पेंटिंग्स आदि। अगर आप खुद बना कर बेच रहे हैं तो ये एक्टिव प्रॉफिट इनकम होगी।
एक्टिव प्रॉफिट इनकम के मॉडल को आप बड़े स्तर पर नहीं ले जा सकते। पर अगर आप अपने प्रोडक्ट को बस डिज़ाइन कर रहे हैं और कोई अन्य उत्पाद आपके लिए प्रोडक्ट बना रहा हैं, या फिर आप कोई डिजिटल प्रोडक्ट बनाते हैं तो इस प्रॉफिट इनकम को बड़े स्तर पर ले जाने और इसको पैसिव इनकम बनाने की संभावना आपके पास ज़्यादा होती हैं, क्योंकि इसमें अगर आप एक बार अपने व्यापार की प्रक्रिया सेट कर लेते हैं या कर्मचारियों को काम पर रख लेते हैं तो आपके पास फिर खाली समय बचता है। कभी भी कोई भी बिज़नेस स्टार्ट करने से पहले हमको ये देखना ज़रूरी होता है कि वह एक बड़े स्तर तक स्केल किया जा सकता है या नहीं।
ब्याज आय-Interest Income
तीसरी आय श्रेणी होती है Interest Income. ये आय तब बेहतर है जब आप किसी को अपने पैसे उधार देते हैं और उस पर ब्याज लेते हैं। बैंक डिपॉजिट्स, गवर्नमेंट बांड्स, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि इंटरेस्ट इनकम कमाने के कुछ माध्यम हो सकते हैं। ये इनकम पूरी तरह से पैसिव इनकम होती है, क्योंकि इसको कमाने के लिए आपको सक्रिय रूप से काम नहीं करना पड़ता। अक्सर देखा जाता है कि आप जो पैसे lend करते हैं उस पर ज़्यादा ब्याज तो नहीं आता, पर आप सुरक्षित महसूस कर सकते हैं कि यहाँ से आपको एक रिटर्न की स्थिर राशि मिलती रहेगी। अपनी पहचान वालों, रिश्तेदारों या दोस्तों को पैसे ब्याज पर देने से बचें। इससे आपके रिश्ते ख़राब हो सकते हैं।
लाभांश आय-Dividend Income
चौथी इनकम केटेगरी हैं Dividend Income. डिविडेंड इनकम तब मिलती है जब आप किसी कंपनी में निवेश करते हैं और वह कंपनी जो मुनाफा कमाती है उस मुनाफे का कुछ हिस्सा आपको डिविडेंड के रूप में देती है। जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो उस कंपनी पर कुछ मालिकाना हक़ आपका भी हो जाता है और इसी कारण आप उसके कुछ मुनाफे के हक़दार भी बन जाते हैं। इसलिए कंपनी अपने शेयरधारकों को profit में से डिविडेंड देती है। डिविडेंड आम तौर पर हर quarter, मतलब की हर तीन महीने में दिए जाते हैं। अब ये ज़रूरी नहीं है कि हर कंपनी आपको डिविडेंड दे। हर कंपनी का डिविडेंड देने का अपना-अपना तरीका होता है। अगर आपका निवेश करने का मुख्य मकसद डिविडेंड कामना है तो पहले थोड़ी research करें कि कौन-सी कंपनी एक अच्छी डिविडेंड देने का इतिहास रखती है।
किराए से आय-Rental Income
पांचवी केटेगरी है rental Income, या फिर किराए से आने वाली इनकम। रेंटल इनकम का funda सरल है। जब आप अपनी कोई संपत्ति किसी को इस्तेमाल करने के लिए देते हैं और उसके बदले में किराये के रूप में पैसे लेते हैं, तो ये इनकम रेंटल इनकम कहलाती है। आमतौर पर घर या कार को रेंट पर दे कर लोग पैसे कमाते हैं। पर ऐसा माना जाता है कि व्यावसायिक संपत्ति (commercial property) से सबसे ज़्यादा रेंटल इनकम मिलती है। व्यावसायिक संपत्ति मतलब कि वह जगह जिसका इस्तेमाल बिज़नेस करने में हो सकता है। अगर आपकी बिल्डिंग में कोई दुकान खोल रहा है या ऐसा ही कोई दूसरा बिज़नेस कर रहा हैतो उससे आपके पास ज़्यादा किराया आएगा। वहीँ अगर आपकी बिल्डिंग एक घर के रूप में इस्तेमाल हो रही है जिसमे आपके किरायेदार रह रहे हैं, तो उससे आपकी रेंटल इनकम कुछ काम आएगी।
ज़रूरी नहीं है कि आपको रेंटल इनकम के लिए बड़े-बड़े निवेश ही करने पड़ें। आप कम निवेश वाली चीज़ें भी रेंट पर दे सकते हैं। जैसे कि कोई instruments, इवेंट्स के लिए स्पीकर सिस्टम, handicrafts आदि।
अवशिष्ट या रॉयल्टी आय-Residual or Royalty Income
हमारी छठी इनकम स्रोत है रेसिडुअल या रॉयल्टी इनकम। इस सोर्स से आपको आपके एक बार किये गए काम के लिए भविष्य में लगातार इनकम होती रहती है। जैसे अगर आपने कोई किताब लिखी है तो वह जब तक बिकती रहेगी रॉयल्टी आपको मिलती रहेगी। कुछ लेखकों की किताबों पर movies और टीवी धारावाहिक भी बन जाते हैं। ऐसे केस में उनको और ज़्यादा रॉयल्टी मिलती है। यूट्यूब पर एक बार बनायीं गयी वीडियो को जब तक लोग देखते रहते हैं, तब तक उसको डालने वाले को इनकम होती रहती है। संगीत बनाने वालों का संगीत जितनी बार लोग iTunes या Spotify आदि पर सुनते हैं, उनको उतना पैसा मिलता जाता है। फोटोग्राफर्स, illustrations, icons और logo बनानेवाले लोग भी इसी तरह अपनी कृतियों को एकबार बना कर हमेशा इनकम उत्पन्न करते रहते हैं।
पूँजीगत लाभ-Capital gains
और आखिर में आता हैं पूँजीगत लाभ या Capital gains. जब आपके किसी संपत्ति का मूल्य बढ़ जाता है और फिर उसको बेच कर आप जो पैसे कमाते हैं उसको बोलते हैं कैपिटल गेन्स। वैसे तो हम ज़्यादातर वह चीज़ें लेते हैं जिनका मूल्य वक्त के साथ काम होता जाता है, जैसे मोबाइल फ़ोन, कार, बाइक, टीवी आदि। पर बहुत-सी चीज़ें ऐसी भी होती हैं जिनका मूल्य वक्त के साथ बढ़ भी सकता है। जैसे स्टॉक्स, प्रॉपर्टी, metals जैसे कि सोना। मान लीजिये आपने कोई चीज़ 1 लाख रूपये में खरीदी थी। वक्त के साथ जब उस चीज़ की वैल्यू 1.5 लाख रूपये हो गयी तब आपने उसको बेच दिया, तो जो 50 हजार रूपये की अतिरिक्त आय आपको होगी वह कहलाएगी कैपिटल
तो ये थी 7 अलग प्रकार की आय। हमेशा याद रखिये की कभी भी एक ही आय के स्रोत पर निर्भर मत रहिये। छोटे ही सही पर आपके पास आय के कई स्रोत होने चाहिए। अब हम आपको बताएँगे की इनमे से कुछ आय के स्रोत कैसे आप घर बैठे-बैठे बना सकते हैं।
सबसे पहले इंटरेस्ट इनकम (interest income)। इंटरेस्ट इनकम स्टार्ट करने के लिए आप घर बैठे mutual funds में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आप mutual funds की वेबसाइट पर जा कर अपने सारे कानूनी दस्तावेज़ अपलोड करके सीधा म्यूच्यूअल फंड्स में पैसे डाल सकते हैं। इसके अलावा आजकल बहुत-सी म्यूच्यूअल फंड्स app भी चलती हैं। आप अपने फ़ोन के ज़रिये भी निवेश कर सकते हैं। बस ये बात ध्यान रखिये की इंटरेस्ट इनकम के लिए आपको इंटरेस्ट देने वाले म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करना है जैसे कि liquid funds, debt funds आदि।
इसके बाद डिविडेंड इनकम (dividend income) भी आप घर बैठे कमा सकते हैं। इसके लिए आपके पास दो तरीके हैं। सबसे पहला है सीधा stocks में निवेश करके और दूसरा तरीका है म्यूच्यूअल फंड्स। सीधा stocks में निवेश करने के लिए आपको D-mat और trading खाता खुलवाना पड़ेगा जो की किसी भी स्टॉक ब्रोकर की साइट पर जा कर खुल सकता है, और म्यूच्यूअल फंड्स का तरीका हम आपको पहले ही बता चुके हैं। बस डिविडेंड इनकम के लिए आपको debt funds की जगह equity वाले funds में निवेश करना पड़ेगा।
रॉयल्टी इनकम का सबसे बढ़िया तरीका है कि अगर आप logo आदि बना सकते हैं, कंप्यूटर पर ड्राइंग करने में माहिर हैं, तो Shutterstock, Canva आदि जैसी sites पर अपनी बनायी हुई तस्वीरों को साझा कीजिये और अगर आप किसी विषय में माहिर हैं तो यूट्यूब चैनल शुरू कीजिये, या Udemy जैसी साइट्स पर अपने courses अपलोड कीजिये।
तो पैसे कमाने के विभिन्न तरीकों के बारे में जानके आपको कैसा लगा? टिपण्णी करके ज़रूर बताएँ।
लेख पढने के लिए धन्यवाद।
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| Sources of income | इनकम के विभिन्न स्त्रोत {2021} |
इसके अलावा अंत में हम आपको कुछ तरीके बताएँगे जिससे आप भी घर बैठे इनमे से कुछ sources of income बना सकते हैं।
अर्जित आय-Earned income
सबसे पहली और सबसे आम सोर्स हैं earned income या अर्जित आय। एक एवरेज इंसान की mainly यही एक मात्रा सोर्स ऑफ़ इनकम होती है। जब आप कोई जॉब करते हैं, सैलरी लेते हैं, तब आप earned income से पैसे कमा रहे होते हैं। एक छोटे ओहदे के कर्मचारी से लेकर सीईओ लेवल के कर्मचारी तक सब earned income कमा रहे होते हैं। जी हाँ! सीईओ भी कंपनी का कर्मचारी ही होता है। स्वरोज़गार पेशेवर (self employed professionals) जैसे कि डॉक्टर्स, लॉयर्स और यहाँ तक की freelancers भी इसी वर्ग में आते हैं। earned income तब बनती है जब आप अपने वक्त के बदले में पैसे लेते हैं। इसलिए इसको एक्टिव इनकम (active income) भी कहा जाता है। क्योंकि जब तक आप सक्रिय रूप से काम करते हैं केवल तब तक आपके पास ये इनकम आती है। बड़े से बड़े millionaires भी अपनी शुरुआत एक्टिव इनकम से ही करते हैं, और शुरुआत करने के लिए ये एक अच्छा point भी होता है।
जब आपके पास अपना और अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिए कोई इनकम का माध्यम नहीं होता तब एक्टिव इनकम का सोर्स आप जल्दी से ढूँढ सकते हैं। पर अगर आप इसी वर्ग में लम्बे समय तक बने रहते हैं तब आपके लिए ये वर्ग खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि ये इनकम पूरी तरह से आपके टाइम पर निर्भर करती है जो कि आपके पास सीमित ही होता है। आपके पास भी दूसरों की तरह 24 घंटे होते हैं और इसलिए एक point पर आकर इस इनकम को बढ़ाया नहीं जा सकता। इसलिए शुरूआती दौर में तो earned income सही है पर कुछ समय बाद आपको दूसरे प्रकार की आय बनानी ज़रूरी होती है।
लाभ आय-Profit Income
इसके बाद आता है हमारा दूसरा टाइप-profit Income. ये इनकम तब आती है जब आप कोई भी वस्तु या सर्विस को manufacture कर के sale करते हैं। Manufacturing करने में जितना खर्चा आता है उससे ज़्यादा कीमत पर आप आपका प्रोडक्ट या सर्विस sell करते हैं जिससे मुनाफा होता है। इस स्टेज पर आकर आप एक कर्मचारी से एक व्यवसायी (entrepreneur) बन जाते हैं, क्योंकि अब आप नौकरी की जगह व्यापार कर रहे होते हैं। पहले के टाइम में एक बिज़नेस शुरू करना बहुत कठिन काम होता था क्योंकि इसमें बड़े स्तर का निवेश चाहिए होता था और हर किसी के पास निवेश करने के लिए पैसे नहीं होते थे।
पर इंटरनेट के आने के बाद से बहुत सारे काम बिना निवेश के भी शुरू करना संभव हो गया है। प्रॉफिट इनकम भी दो तरह की हो सकती है: एक्टिव इनकम और पैसिव इनकम (active income and passive income)। अगर आप उत्पाद (product) खुद अपने हाथों से manufacture कर रहे हैं तो ये एक एक्टिव इनकम होगी। इसमें भी आप जब तक काम कर रहे हैं तभी तक income आएगी। उदहारण के लिए हैंडीक्राफ्ट्स, पेंटिंग्स आदि। अगर आप खुद बना कर बेच रहे हैं तो ये एक्टिव प्रॉफिट इनकम होगी।
एक्टिव प्रॉफिट इनकम के मॉडल को आप बड़े स्तर पर नहीं ले जा सकते। पर अगर आप अपने प्रोडक्ट को बस डिज़ाइन कर रहे हैं और कोई अन्य उत्पाद आपके लिए प्रोडक्ट बना रहा हैं, या फिर आप कोई डिजिटल प्रोडक्ट बनाते हैं तो इस प्रॉफिट इनकम को बड़े स्तर पर ले जाने और इसको पैसिव इनकम बनाने की संभावना आपके पास ज़्यादा होती हैं, क्योंकि इसमें अगर आप एक बार अपने व्यापार की प्रक्रिया सेट कर लेते हैं या कर्मचारियों को काम पर रख लेते हैं तो आपके पास फिर खाली समय बचता है। कभी भी कोई भी बिज़नेस स्टार्ट करने से पहले हमको ये देखना ज़रूरी होता है कि वह एक बड़े स्तर तक स्केल किया जा सकता है या नहीं।
ब्याज आय-Interest Income
तीसरी आय श्रेणी होती है Interest Income. ये आय तब बेहतर है जब आप किसी को अपने पैसे उधार देते हैं और उस पर ब्याज लेते हैं। बैंक डिपॉजिट्स, गवर्नमेंट बांड्स, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि इंटरेस्ट इनकम कमाने के कुछ माध्यम हो सकते हैं। ये इनकम पूरी तरह से पैसिव इनकम होती है, क्योंकि इसको कमाने के लिए आपको सक्रिय रूप से काम नहीं करना पड़ता। अक्सर देखा जाता है कि आप जो पैसे lend करते हैं उस पर ज़्यादा ब्याज तो नहीं आता, पर आप सुरक्षित महसूस कर सकते हैं कि यहाँ से आपको एक रिटर्न की स्थिर राशि मिलती रहेगी। अपनी पहचान वालों, रिश्तेदारों या दोस्तों को पैसे ब्याज पर देने से बचें। इससे आपके रिश्ते ख़राब हो सकते हैं।
लाभांश आय-Dividend Income
चौथी इनकम केटेगरी हैं Dividend Income. डिविडेंड इनकम तब मिलती है जब आप किसी कंपनी में निवेश करते हैं और वह कंपनी जो मुनाफा कमाती है उस मुनाफे का कुछ हिस्सा आपको डिविडेंड के रूप में देती है। जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो उस कंपनी पर कुछ मालिकाना हक़ आपका भी हो जाता है और इसी कारण आप उसके कुछ मुनाफे के हक़दार भी बन जाते हैं। इसलिए कंपनी अपने शेयरधारकों को profit में से डिविडेंड देती है। डिविडेंड आम तौर पर हर quarter, मतलब की हर तीन महीने में दिए जाते हैं। अब ये ज़रूरी नहीं है कि हर कंपनी आपको डिविडेंड दे। हर कंपनी का डिविडेंड देने का अपना-अपना तरीका होता है। अगर आपका निवेश करने का मुख्य मकसद डिविडेंड कामना है तो पहले थोड़ी research करें कि कौन-सी कंपनी एक अच्छी डिविडेंड देने का इतिहास रखती है।
किराए से आय-Rental Income
पांचवी केटेगरी है rental Income, या फिर किराए से आने वाली इनकम। रेंटल इनकम का funda सरल है। जब आप अपनी कोई संपत्ति किसी को इस्तेमाल करने के लिए देते हैं और उसके बदले में किराये के रूप में पैसे लेते हैं, तो ये इनकम रेंटल इनकम कहलाती है। आमतौर पर घर या कार को रेंट पर दे कर लोग पैसे कमाते हैं। पर ऐसा माना जाता है कि व्यावसायिक संपत्ति (commercial property) से सबसे ज़्यादा रेंटल इनकम मिलती है। व्यावसायिक संपत्ति मतलब कि वह जगह जिसका इस्तेमाल बिज़नेस करने में हो सकता है। अगर आपकी बिल्डिंग में कोई दुकान खोल रहा है या ऐसा ही कोई दूसरा बिज़नेस कर रहा हैतो उससे आपके पास ज़्यादा किराया आएगा। वहीँ अगर आपकी बिल्डिंग एक घर के रूप में इस्तेमाल हो रही है जिसमे आपके किरायेदार रह रहे हैं, तो उससे आपकी रेंटल इनकम कुछ काम आएगी।
ज़रूरी नहीं है कि आपको रेंटल इनकम के लिए बड़े-बड़े निवेश ही करने पड़ें। आप कम निवेश वाली चीज़ें भी रेंट पर दे सकते हैं। जैसे कि कोई instruments, इवेंट्स के लिए स्पीकर सिस्टम, handicrafts आदि।
अवशिष्ट या रॉयल्टी आय-Residual or Royalty Income
हमारी छठी इनकम स्रोत है रेसिडुअल या रॉयल्टी इनकम। इस सोर्स से आपको आपके एक बार किये गए काम के लिए भविष्य में लगातार इनकम होती रहती है। जैसे अगर आपने कोई किताब लिखी है तो वह जब तक बिकती रहेगी रॉयल्टी आपको मिलती रहेगी। कुछ लेखकों की किताबों पर movies और टीवी धारावाहिक भी बन जाते हैं। ऐसे केस में उनको और ज़्यादा रॉयल्टी मिलती है। यूट्यूब पर एक बार बनायीं गयी वीडियो को जब तक लोग देखते रहते हैं, तब तक उसको डालने वाले को इनकम होती रहती है। संगीत बनाने वालों का संगीत जितनी बार लोग iTunes या Spotify आदि पर सुनते हैं, उनको उतना पैसा मिलता जाता है। फोटोग्राफर्स, illustrations, icons और logo बनानेवाले लोग भी इसी तरह अपनी कृतियों को एकबार बना कर हमेशा इनकम उत्पन्न करते रहते हैं।
पूँजीगत लाभ-Capital gains
और आखिर में आता हैं पूँजीगत लाभ या Capital gains. जब आपके किसी संपत्ति का मूल्य बढ़ जाता है और फिर उसको बेच कर आप जो पैसे कमाते हैं उसको बोलते हैं कैपिटल गेन्स। वैसे तो हम ज़्यादातर वह चीज़ें लेते हैं जिनका मूल्य वक्त के साथ काम होता जाता है, जैसे मोबाइल फ़ोन, कार, बाइक, टीवी आदि। पर बहुत-सी चीज़ें ऐसी भी होती हैं जिनका मूल्य वक्त के साथ बढ़ भी सकता है। जैसे स्टॉक्स, प्रॉपर्टी, metals जैसे कि सोना। मान लीजिये आपने कोई चीज़ 1 लाख रूपये में खरीदी थी। वक्त के साथ जब उस चीज़ की वैल्यू 1.5 लाख रूपये हो गयी तब आपने उसको बेच दिया, तो जो 50 हजार रूपये की अतिरिक्त आय आपको होगी वह कहलाएगी कैपिटल
तो ये थी 7 अलग प्रकार की आय। हमेशा याद रखिये की कभी भी एक ही आय के स्रोत पर निर्भर मत रहिये। छोटे ही सही पर आपके पास आय के कई स्रोत होने चाहिए। अब हम आपको बताएँगे की इनमे से कुछ आय के स्रोत कैसे आप घर बैठे-बैठे बना सकते हैं।
सबसे पहले इंटरेस्ट इनकम (interest income)। इंटरेस्ट इनकम स्टार्ट करने के लिए आप घर बैठे mutual funds में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आप mutual funds की वेबसाइट पर जा कर अपने सारे कानूनी दस्तावेज़ अपलोड करके सीधा म्यूच्यूअल फंड्स में पैसे डाल सकते हैं। इसके अलावा आजकल बहुत-सी म्यूच्यूअल फंड्स app भी चलती हैं। आप अपने फ़ोन के ज़रिये भी निवेश कर सकते हैं। बस ये बात ध्यान रखिये की इंटरेस्ट इनकम के लिए आपको इंटरेस्ट देने वाले म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करना है जैसे कि liquid funds, debt funds आदि।
इसके बाद डिविडेंड इनकम (dividend income) भी आप घर बैठे कमा सकते हैं। इसके लिए आपके पास दो तरीके हैं। सबसे पहला है सीधा stocks में निवेश करके और दूसरा तरीका है म्यूच्यूअल फंड्स। सीधा stocks में निवेश करने के लिए आपको D-mat और trading खाता खुलवाना पड़ेगा जो की किसी भी स्टॉक ब्रोकर की साइट पर जा कर खुल सकता है, और म्यूच्यूअल फंड्स का तरीका हम आपको पहले ही बता चुके हैं। बस डिविडेंड इनकम के लिए आपको debt funds की जगह equity वाले funds में निवेश करना पड़ेगा।
रॉयल्टी इनकम का सबसे बढ़िया तरीका है कि अगर आप logo आदि बना सकते हैं, कंप्यूटर पर ड्राइंग करने में माहिर हैं, तो Shutterstock, Canva आदि जैसी sites पर अपनी बनायी हुई तस्वीरों को साझा कीजिये और अगर आप किसी विषय में माहिर हैं तो यूट्यूब चैनल शुरू कीजिये, या Udemy जैसी साइट्स पर अपने courses अपलोड कीजिये।
तो पैसे कमाने के विभिन्न तरीकों के बारे में जानके आपको कैसा लगा? टिपण्णी करके ज़रूर बताएँ।
लेख पढने के लिए धन्यवाद।

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