Need of stock market | स्टॉक मार्किट की ज़रुरत क्यों है ? {2021}

नमस्कार दोस्तों। Stock market में किसी भी तरह की शुरुआत से पहले एक नए आदमी के मन में अक्सर यह दो प्रश्न ज़रूर आते हैं-पहला प्रश्न, आख़िर स्टॉक मार्केट की शुरुआत कैसे हुई और दूसरा प्रश्न, आख़िर स्टॉक मार्केट की ज़रुरत क्यों है? हमारे ख़्याल से आप भी इन सवालों के जवाब ज़रूर जानना चाहते होंगे। अगर ऐसा है तो आप यह लेख पूरा पढ़ें, क्योंकि यहाँ हम दोनों सवालों का जवाब बिल्कुल आसान भाषा में समझाने की कोशिश करेंगे कि आख़िर stock market की शुरुआत कैसे हुई और इसकी ज़रूरत क्यों है।
 
Need of stock market | स्टॉक मार्किट की ज़रुरत क्यों है ? {2021}
Need of stock market | स्टॉक मार्किट की ज़रुरत क्यों है ? {2021}

चलिए पहले देखते हैं कि स्टॉक मार्केट की शुरुआत कैसे हुई

आपने एक मशहूर कहावत ज़रूर सुनी होगी कि ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है।‘ स्टॉक मार्केट का जन्म यानी की शुरुआत के पीछे भी एक बहुत बड़ी आवश्यकता थी, और इस आवश्यकता का नाम है ‘पूंजी की आवश्यकता।‘ एक बिज़नेस को बड़े पैमाने पर चलाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता के कारण ही स्टॉक मार्केट की शुरुआत हुई थी। जब भी किसी कंपनी को अपना बिज़नेस बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ाना होता है, तो उन्हें बहुत ज़्यादा पैसों की ज़रूरत, यानी पूंजी की ज़रूरत होती है। ऐसे में कम्पनियों के पास अपने बिज़नेस को बढ़ाने के लिए पूंजी के रूप में पैसे इकट्ठा करने के अलग-अलग कुछ विकल्प होते हैं।

पहला विकल्प है किसी बैंक से लोन लेना।

दूसरा विकल्प है ऐसे पूंजी पतियों से लोन लेना जिनके पास बहुत सारा पैसा हो।

और तीसरा विकल्प है स्टॉक मार्केट, या जिसे कैपिटल मार्केट भी कहते हैं। स्टॉक मार्केट में अपने शेयर को बेच कर भी पूंजी इकट्ठा की जा सकती है।

आइये इन विकल्पों को थोड़ी बारीकी से देखते हैं।
बैंक से लोन लेना

बैंक हमेशा ब्याज पर ही पैसा देता है और एक नए बिज़नेस के लिए जो कि बहुत कम लाभ कमा पाता है, और कभी-कभी उसे नुक्सान भी होता है, ऐसे में बैंक का ब्याज एक नए बिज़नेस के लिए बहुत बड़ा ख़र्च बन जाता है, और कंपनी के ऊपर हमेशा बैंक का क़र्ज़ चुकाने का दबाव बना रहता है। इसलिए कंपनियाँ अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए बहुत ज़्यादा लोन नहीं ले सकती हैं।

पूंजीपतियों से क़र्ज़ लेनाा

इस विकल्प में भी किसी पूंजीपति से लोन लेने पर उसे ब्याज चुकाना होता है, या लाभ में निश्चित हिस्सा देना होता है। ऐसे में कंपनी के ऊपर हमेशा क़र्ज़ चुकाने का दबाव बना रहता है। परिणामस्वरूप कंपनी बहुत बड़े पैमाने पर अपना काम नहीं कर पाती है। जब पूंजी की आवश्यकता कि मात्रा बहुत ज़्यादा होती है तो इसे एक बेहतर विकल्प नहीं माना जा सकता।

Stock market या Capital market

तीसरा और सबसे बड़ा विकल्प है स्टॉक मार्केट या कैपिटल मार्किट। यहाँ आप पैसे या capital के रूप में पैसे इकट्ठा कर सकते हैं। ऐसे में स्टॉक मार्केट कंपनी के लिए सबसे बेहतर विकल्प होता है जब उसे ज़्यादा पूंजी की ज़रूरत होती है। यहाँ कंपनी कुच्छ कानूनी प्रक्रिया को पूरा करके अपनी ज़रूरत के मुताबिक पूंजी प्राप्त कर सकती है, और पूंजी को वापस करने का कंपनी के ऊपर कोई भी दबाव नहीं होता, और ना ही किसी तरह का ब्याज देने का बोझ होता है। अगर कंपनी stock market में अपने stock बेचकर पूंजी इकट्ठा करती है, तो वह अपनी future growth के प्लान के हिसाब से काम कर सकती है और अपना व्यापार बड़े पैमाने पर कर सकती है।

तो इस तरह स्टॉक मार्केट हमारी आज की अर्थव्यवस्था कि सबसे बड़ी ज़रूरत है, जिसकी वज़ह से सभी बड़ी कंपनियाँ इतने बड़े पैमाने पर बिज़नेस कर पाती हैं। आज हम जितने भी बड़ी कंपनियों को देखते हैं, जैसे गोदरेज, बजाज, रिलायंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट, एयरटेल, टाटा और ऐसी कई कम्पनियाँ हैं, वे अपने व्यापार को ज़्यादा बढ़ाने के लिए पूंजी की आवश्यकता को सिर्फ़ स्टॉक मार्केट से ही पूरा करती हैं। अगर आप देखें कि स्टॉक मार्केट की ज़रूरत क्यों है? तो इसका सीधा-सा उत्तर है कि स्टॉक मार्केट की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि कोई भी कंपनी अपने बिज़नेस को बढ़ाने के लिए, जब उसे भारी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है, तो वह आवश्यकता उसकी स्टॉक मार्केट से ही पूरी हो सकती है। स्टॉक मार्केट के बिना किसी भी कंपनी को भारी मात्रा में पूंजी जमा कर पाना संभव नहीं हो पाता है।

stock market की शुरुआत

सन 1500 से 1600 के आसपास, जब यूरोप के व्यापारी दूसरे देशों से पानी के जहाज़ की मदद से व्यापार किया करते थे, तो उन्हें बहुत फायदा होता था, क्योंकि वे दूसरे देशों से सस्ता सामान खरीदते थे और अपने देश में उसे ज़्यादा लाभ के साथ बेच सकते थे। लेकिन कभी-कभी समंदर में जहाज़ डूब जाने या रास्ते में चोरी हो जाने से उनको भारी नुक़सान भी होता था। ऐसे में जिन व्यापारियों का जहाज़ डूब जाता था यह चोरी हो जाती थी, उनको बहुत अधिक नुक़सान हो जाता था। इससे उनके पास फिर से व्यापार करने के लिए पूंजी की हमेशा बहुत कमी रहती थी।

व्यापारियों ने पूंजी की कमी को पूरा करने के लिए एक योजना तैयार की। उन्होंने हर व्यापारिक समुद्री यात्रा के हिसाब से एक कंपनी बनाई जिसमें वे बहुत सारे लोगों से अलग-अलग पैसा लेते थे, और जब जहाज़ लौटकर आता था तो वे माल बेचकर जो भी लाभ होता था, वह उन लोगों में बांट दिया जाता था जिन्होंने पैसा लगाया होता था, और उस कंपनी को बंद कर दिया जाता था। यहाँ परेशानी यह थी कि जब कोई जहाज़ डूब जाता था तो वह लोग जिन्होंने पैसा लगाया होता था, वह दुबारा पैसा नहीं लगाना चाहते थे। अब ऐसे में बहुत सारी परेशानियाँ आती गयीं, जिनका उन व्यापारियों ने हल निकालना जारी रखा। इससे धीमे-धीमे joint stock company की शुरुआत हुई जिसमें पूंजी के रूप में कोई भी पैसे लगा सकता था। इनमें से सबसे प्रमुख कंपनी थी ईस्ट इंडिया कंपनी।

Joint stock कंपनी में बहुत सारे लोगों के पैसे लगे होते थे और कंपनी अपने व्यापार से जो लाभ कमाती थी वह निवेशकों में बांट देती थी और फिर धीरे-धीरे जो भी समस्याएँ आती गयीं उनका हल निकालते-निकालते finally एक stock market बन गया। हर वह कंपनी जो अपना व्यापार बढ़ाना चाहती है और जिसे अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है, वह कंपनी stock market से इस पूंजी की ज़रुरत को पूरा कर सकती है और जो लोग उस कंपनी में पूंजी लगाते हैं उन्हें उस पूंजी के बदले कंपनी में stock, यानी कंपनी में अपना एक हिस्सा मिल जाता है। फिर जैसे-जैसे कंपनी का व्यापार बढ़ता है, वैसे-वैसे उस stock की क़ीमत भी बढ़ती जाती है। ऐसे में जिन लोगों के पास वह stock होता है, वे उस stock को स्टॉक मार्केट में बिना कंपनी से पूछे बेच कर लाभ कमा सकते हैं। यह कंपनी और कंपनी में पैसा लगाने वाले, दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है।

आशा है इसे लेख को पढ़ने के बाद आप history of stock market के बारे में जान पाए होंगे, और समझ पायें होंगे कि stock market की शुरुआत कैसे हुई और इसकी की ज़रूरत क्यों है।

धन्यवाद।

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