How to control anger | अपने गुस्से को कैसे कंट्रोल करें {2021}

गुस्सा यानि anger एक इमोशन है। एक बहुत ही पावरफुल emotion. कोई भी इमोशन यदि हमारे कंट्रोल में है तो अच्छा और फायदेमंद है। लेकिन अगर वह इमोशन हमें कंट्रोल करना शुरू हो जाए तो वह हमें नुकसान पहुंचा सकता है। दोस्तों anger यानी गुस्सा बुरा नहीं जब तक वह हमारे कंट्रोल में है। लेकिन अगर हम अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर सकते, अगर गुस्सा हम पर हावी हो जाता है, तो हम गुस्से की हालत में कुछ ऐसा कर जाते हैं जिस पर हमें बाद में अफसोस होता है, पछतावा होता है कि ‘’यार ऐसा नहीं करता, ऐसा नहीं बोलता तो अच्छा था।‘’ इसलिए हमें फिक्र होनी चाहिए अपने anger को control करने के बारे में।
 
How to control anger | अपने गुस्से को कैसे कंट्रोल करें {2021}
How to control anger | अपने गुस्से को कैसे कंट्रोल करें {2021}

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि गुस्सैल प्रतिक्रियाएं आपके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हैं। Yale विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक क्रोधित होने वाले लोग अधिक बीमार पड़ते हैं। उनका गुस्सा वास्तव में उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को कमज़ोर करता है। अन्य अध्ययनों ने कोरोनरी बीमारी से लेकर उच्च रक्तचाप (high blood pressure) तक, हर चीज़ से गुस्से को जोड़ा है।

इस लेख में हम गुस्से को कंट्रोल करने के 5 तरीकों पर बात करेंगे जो आपकी जिंदगी को बदल सकते हैं। यदि इन तरीकों पर आप अमल करेंगे तो आप 100% अपने गुस्से को कंट्रोल करना सीख जाएंगे।

दोस्तों हम बात तो करते हैं, ‘’यार मेरा गुस्से पर कंट्रोल नहीं है, मैं क्या करूं, मुझे कोई हल बताया जाए जिससे मैं अपने गुस्से को कंट्रोल करना सीख लूँ।‘’ परन्तु क्या आपको पता है कि हम सब को अच्छे अंदाज़ में अपने गुस्से को कंट्रोल करना आता है? और हम कर भी रहे होते हैं जब हमारी मर्ज़ी होती हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि एक शख्स एक वक्त में एक जगह पर बड़े ही अच्छे अंदाज़ में अपने गुस्से को कंट्रोल कर रहा होता है। और वाही शख्स किसी दूसरी जगह पर मामूली सी बात पर आपे से बाहर हुआ होता है। यह हमारे क्रोध को नियंत्रित करने के पहले बिंदु पर लाता है।

स्वीकार करें कि आपको अपनी इच्छा पर गुस्सा आता है – Accept that you get angry at your own wish

उदहारण के तौर पे- आप कहीं जॉब करते हैं और आपके बॉस ने बिना आपकी गलती के बिना वजह ही आपको डांटना शुरू कर दिया, तो आप क्या करेंगे? क्या आप अपने बॉस को आंखें दिखाएंगे, जवाब में गुस्सा करेंगे? नहीं, आप हरगिस भी ऐसा नहीं करेंगे। बस चुप-चाप नीचे मुंह करके खड़े रहेंगे और अपने बॉस की डांट सुनते रहेंगे। अगर आपको गुस्सा आएगा भी तो आप 100% अपने गुस्से को कंट्रोल करेंगे क्योंकि आपको पता है कि गुस्सा किया तो उसके परिणाम खराब होंगे। आपकी performance रिपोर्ट ख़राब हो सकती है या आपकी जॉब भी जा सकती है। आपके कैरियर को भी ख़तरा हो सकता है। परन्तु यही लोग घर में खाना 5 मिनट देर से मिलने पर गुस्सा कर ज़रा-ज़रा सी बात पर शोर मचा रहे होते हैं।

तो जहां हमारा ज़ोर चलता है वहां हम गुस्सा करते हैं, और जहाँ हमारा ज़ोर नहीं चलता, हमें नुकसान का खतरा होता है, वहां पर हम गुस्से को पी जाते हैं, और अच्छे बन जाते हैं। तो दोस्तों, सबसे पहले तो आप अपने गुस्से की responsibility लें कि आप अपनी मर्ज़ी से गुस्सा करते हैं। क्योंकि अगर आप इस बात को समझ गए, मान गए कि आप अपनी मर्ज़ी से गुस्सा करते हैं तो फिर आप अपनी मर्ज़ी से इसको कंट्रोल भी कर सकते हैं। फिर कंट्रोल आपके हाथ में आ जाएगा।

अपनी सांस को नियंत्रित करें और अपनी मांसपेशियों को आराम दें – Control your breathing and relax your muscles

जब कोई चीज़ आपको परेशान करती है, तो चीखने या मुह लाल करने के बजाय गहरी सांसें लेते हुए 2 से 3 मिनट बिताएं। अपनी नाक के माध्यम गहरी सांस लें और अपने मुंह के माध्यम से सांस छोड़ें। शांत नीली हवा की साँस लेने की कल्पना करें और उस लाल ज़हरीली हवा को बाहर निकालें। अपनी मुट्ठी बंद करें। कंधों को ढीला करने के लिए एक सचेत प्रयास करें और अपने शरीर को ढीला छोड़ें। यह क्रिया आपकी मांसपेशियों को खोलने में मदद करेगी और आपके गुस्से को नियंत्रित करेगी। अगली बार जब आप क्रोधित हों तो यह क्रिया ज़रूर करें।

हालाँकि उपरोक्त अभ्यास ज़रुरत पड़ने पर अस्थायी (temprorary) रूप से क्रोध को नियंत्रित करता है। लेकिन हमारा मकसद इसे प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित करना है। इसके लिए निम्न विधियों को अपनाना होगा।

अपने और अपने शरीर के प्रति जागरूक रहें – Be aware of yourself and your body

दोस्तों हमारी बॉडी की जो ability होती है उसका भी हमारे गुस्से के साथ direct लिंक होता है। हमारे शारीर में जो कुछ चल रहा होता है वह गुस्से को ट्रिगर कर सकता है या हमें agitate कर सकता है। इसलिए गुस्से को कंट्रोल करने के लिए हमें अपनी बॉडी से अवगत होना चाहिए।

जैसे अगर आपको भूख लगी हुई है, और आपको खाना नहीं मिल रहा, या खाने में कुछ देर लग रही है, तो उस वक्त आप थोड़ा uncomfortable महसूस कर रहे होते हैं, आप थोड़े बेचैन होते हैं। आपका ध्यान खाने की तरफ और उसके इंतज़ार में होता है। अगर उस समय कोई आपके साथ बहस करेगा तो आपके गुस्से में आने के chances ज्यादा होंगे, बजाये उसके कि जब आपका पेट भरा हुआ है।

वैसे ही जब आप थके हुए घर आए हैं, और आपकी बीवी या आपका कोई फैमिली मेंबर आपसे ऐसी बात करना चाह रहा है जिसमें difference of opinion हो सकता है, तो अगर आप उस वक्त ऐसी discussion में पड़ जाएंगे तो सम्भावना हैं कि आपको किसी बात पर गुस्सा आ जाए। बेहतर होगा कि आप अपनी wife या अपने फैमिली मेंबर को बोलें कि ‘’अभी मैं थका हुआ हूं, थोड़ा आराम करके relax हो जाऊं, फिर यह बात कर लेंगे’’, तो आप बात को बेहतर अंदाज़ में कर सकेंगे और आपको गुस्सा भी नहीं आएगा। आपका गुस्से पर कंट्रोल बेहतर हो जाएगा।

संलग्न न हों – Don’t be attached

गुस्सा आने की बहुत बड़ी वजह हमारी किसी भी चीज के साथ अटैचमेंट है। अगर आप किसी भी चीज़ के साथ strongly attached हैं, जैसे आपका कोई आईडिया, कोई point of view, आप खुद हो, या आपकी कोई अन्य चीज़ है। यदि आपने अपने अंदर कोई भी चीज़ strongly पकड़ी हुई है तो आपको गुस्सा ज़रूर आएगा। लेकिन अगर आपने कोई चीज़ नहीं पकड़ी हुई, आप उससे strongly attached नहीं हो तो आपको गुस्सा कैसे आ सकता है?

जैसे अगर आपकी कोई राय है, और उस राय के साथ आप strongly जुड़े हैं, और उसे 100% सही माना हुआ है, तो अगर कोई आपके उस राय से असहमत होगा तो आपको गुस्सा आना शुरू हो जाएगा। जितना आप उस राय से attached होंगे, उतना ही ज़्यादा आपको गुस्सा आएगा।

जैसे कि लोग politics या religious issues पर बात करते हुए anger में आ जाते हैं। उन्होंने अपनी ही बात को सही माना होता है, और अपनी ही बात पर उन्हें यकीन होता है। हालाँकि ये सिर्फ उनकी एक राय होती है। और अगर वह अपनी बात को सिर्फ राय के तौर पर ही माने तो उनको गुस्सा नहीं आएगा। तो strong likes और strong dislikes की वजह से strong emotions पैदा होते हैं और strong actions होते हैं।

लेकिन अगर आप यह सोचिए कि ‘’यह तो मेरा सिर्फ एक आईडिया या point of view है, और ज़रूरी नहीं कि बाकी सब लोग भी ऐसा ही सोचे जैसा मैं सोच रहा हूं। यदि लोग मेरे इस आईडिया के साथ सहमत नहीं भी हैं तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।‘’ अगर आप यह बात समझ जायेंगे और इसका अभ्यास करेंगे तो आप देखेंगे आपको अपने गुस्से पर कंट्रोल मिलना शुरू हो जाएगा। आपको गुस्सा आना कम हो जाएगा।

चीज़ों को जाने दीजिये – Let the things go

दोस्तों ये दुनिया हमारी मर्जी से नहीं चल रही। जब हम नहीं थे तो भी यह चल रही थी, और जब हम नहीं होंगे तो यह तब भी चलती रहेगी। तो हम अपनी मर्ज़ी चलाने की इतनी कोशिश क्यों करते हैं? गुस्सा आने की यह एक बहुत बड़ी वजह होती है। अक्सर हमें गुस्सा तब आता है जब हम समझते हैं कि चीज़ें हमारी मर्ज़ी के मुताबिक नहीं चल रही, ‘’हमसे यह काम क्यों नहीं हो पा रहा, या काम जिस तरह में चाहता हूं उस तरह क्यों नहीं हुआ? ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है? लोग मेरी बात क्यों नहीं समझते? उनको यह क्यों पता नहीं चलता कि मैं उनको सही guide कर रहा हूं?’’ जब वो चीज़ें जिनको हम कंट्रोल करना चाहते हैं, वह हमारे कंट्रोल में नहीं आती तो हमें गुस्सा आता है।

अगर आप खुशी चाहते हैं, अमन चाहते हैं, तो हर चीज़ को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक करने या अपने कंट्रोल में करने की कोशिश छोड़ दें। जो चीज़ें आपके कंट्रोल में नहीं होती, आपकी मर्ज़ी के मुताबिक नहीं हो पाती उनपर गुस्सा करना या उन उनके बारे में परेशान होना छोड़ दें। याद रखें कि हर चीज़ होने के पीछे कारण होता है, और इसलिए चीज़ों को अपने रास्ते जाने देना सीखें। एक माचिस की तीली ज़रा सी रगड़ से बहुत जल्दी आग पकड़ लेती है, क्योंकि उसके पास सर तो होता है, लेकिन दिमाग नहीं होता। हमने ये फैसला करना है कि क्या हमने वह माचिस की तीली बनना है, और ज़रा-ज़रा सी बात पर गुस्से में आ जाना है या फिर अपने दिमाग का इस्तेमाल करना है और गुस्से को कंट्रोल करना सीखना है। फैसला आपके हाथ में है।

दोस्तों, अब आप हमें बताएं कि आपको गुस्सा आता है या नहीं। यदि आता है तो उपर्युक्त बिदुओं को फिर से पढ़ें और अपने जीवन में में ढाल के अपने स्वभाव में परिवर्तन लायें। यदि सुस्सा ख़तम नहीं, तो कम से कम उसे नियंत्रित करने का तरीका आप ज़रूर सीख जायेंगे। परिणामस्वरूप आपकी life और health, दोनों पर इसका अच्छा असर पड़ेगा।

लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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