50 30 20 rule of money | पैसे का 50 30 20 नियम {2021}
दोस्तों क्या आपका बैंक एकाउंट भी महीने के आख़िर में ख़तम हो जाता है? क्या आपको भी हर महीने वेतन मिलने के बावजूद महीने के आखिरी में कभी-कभी अपने दोस्तों से उधार लेना पड़ता है? यदि हाँ, तो यह सिर्फ़ आपकी और कुछ लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि नौकरी करने वाले 100 में से 90, यानी लगभग 90% लोगों को हर महीने वेतन मिलने के बावजूद महीने के अंत में उन्हें पैसे की problem, लगभग खाली बैंक अकाउंट और खाली पर्स की समस्या बनी रहती है।
महीने की शुरुआत में सैलरी मिलने के बाद पैसे आ जाते हैं और कुछ दिन तक सब ठीक रहता है। फिर जैसे-जैसे दिन निकलते हैं और महीने के आखरी 10 दिन बचते हैं, तब तक लगभग सारे पैसे ख़र्च हो चुके होते हैं। थोड़े पैसे जो बचत के नाम पर बैंक में रखे होते हैं, उन्हें भी महीने के आख़िर में ख़र्च कर ही दिया जाता है और इस तरह अगला वेतन मिलने से पहले हमारा पूरा बैंक अकाउंट लगभग खाली-सा हो जाता है।
दोस्तों, आपको क्या लगता है ऐसा क्यों होता है? क्या आपको ऐसा लगता है कि आपकी income कम है, इसलिए पैसे की समस्या हो रही है? तो इसका जवाब है ‘नहीं। कम income होना समस्या नहीं है, बल्कि पैसे को सही तरह से ख़र्च नहीं करना और पैसे का सही तरह से प्रबंधन (manage) नहीं कर पाना हमारे असली समस्याएँ हैं।
जैसे, मान लीजिए राम और श्याम दो दोस्त हैं। राम की आय Rs. 10,000/- है और श्याम की Rs. 50,000/-। फिर भी ना तो राम के पास पैसे बचते हैं और नहीं शाम के पास। अब इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब यह हुआ कि राम जिसकी सैलरी Rs. 10,000/- है, वह यह सोचेगा कि उसकी सैलरी अगर Rs. 20,000/- हो जाएगी तो पैसे की बचत कर पाएगा। जबकि हक़ीक़त में ऐसा नहीं होता। जैसे ही सैलरी बढ़ती है हमारे खर्चे भी बढ़ जाते हैं और इसलिए हमारी हालत वैसे की वैसे ही रह जाती है, और सैलरी बढ़ने के बावजूद कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता।
इसलिए हमारा मानना यह है कि महीने के आखिरी में पैसे की कमी, खाली purse और खाली बैंक अकाउंट की समस्या का सबसे बड़ा कारण होता है पैसे को ख़र्च करने की हमारी आदत। इसलिए यह सीखना बहुत ज़रूरी है कि हम पैसे को किस तरह से ख़र्च करें और पैसे को किस तरह से मैनेज करें।
पैसे manage करने के बहुत से तरीके हैं, लेकिन हम आपसे बहुत ही सिंपल और आसान तरीके के बारे में बात करेंगे जो आपको हमेशा याद रहेगा और हम आपको guarantee देते हैं कि ना तो आपका purse खाली रहेगा और ना ही आपका बैंक खता। पैसे को ख़र्च करने और बचत करने के इस तरीके का नाम है 50 30 20 Thumb rule. यानी पैसे को मैनेज करने का 50/30/ 20 का नियम।
पैसे को मैनेज करने के इस 50 30 20 नियम के बारे में सबसे पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक्सपर्ट एलिज़ाबेथ वारेन और उनकी पुत्री अमेलिया वारेन टेयागी ने अपनी किताब The ultimate lifetime money plan में ने बताया हुआ है। यह बहुत ही आसान-सा नियम है जो कोई भी इंसान अपनी कमाई और ख़र्च के ऊपर लागू कर सकता है और अपने पैसे की समस्या का समाधान कर सकता है।
इस नियम में 50, 30 और 20 एक अनुपात को दर्शाते हैं जो हमारी आय और ख़र्च के बीच में होना चाहिए। इस नियम के अनुसार आय को 50, 30 और 20 के अनुपात में हमें तीन हिस्सों में बांट कर पैसे ख़र्च करने होते हैं। जैसे पूरी आय का 50% हिस्सा बुनियादी ज़रूरतों (basic needs) के ऊपर ख़र्च होना चाहिए, जबकि आय का 30% हिस्सा चाहत और इच्छाओं (wants and wishes) पर और 20% हिस्सा बचत और निवेश (saving and investment) पर सबसे पहले अलग किया जाना चाहिए।
ध्यान दीजिए कि 50 30 20 के इस नियम में तीसरे हिस्से, यानी 20% को सबसे पहले अलग रखना होता है। यानी जैसे ही सैलरी मिलती है आप अपनी सुविधा के अनुसार कम से कम 10% या अधिकतम अपनी सुविधानुसार पैसे आपको बचत के लिए अलग खाते में रख देना चाहिए, जो आप सिर्फ़ निवेश और वित्तीय लक्ष्य (financial goal) को पूरा करने के लिए ही इस्तेमाल करेंगे। आप किसी भी हालत में इस 20% का इस्तेमाल नहीं करेंगे, बल्कि इसे बचत के लिए अलग रखेंगे।
आइये इस नियम के बारे में थोड़ा और विस्तार में बात करते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है। हर इंसान के पास 3 तरह के खर्चे होते हैं।
1. Basic needs– इसमें रोटी कपड़ा और मकान से सम्बंधित ख़र्च शामिल होते हैं।
2. Wants and wishes– जिसमें मनोरंजन, नए मोबाइल, टीवी, फर्नीचर, फैशनेबल कपड़े, घर की सजावट और कुछ विलासिता (luxury) वाले खर्चे भी आ जाते हैं।
3. Saving and investment– यह पैसों की बचत और निवेश करने की ज़रूरत को पूरा करता।
50/30/20 का नियम बिल्कुल आसान शब्दों में हमें यही बताता है कि हमें इन तीन तरह के खर्चों में किस तरह के खर्चे में कितने रुपए ख़र्च करने चाहिए। जैसा हमने पहले देखा इस नियम के अनुसार हमें अपनी कुल आय का 50% हिस्सा अपनी बुनियादी ज़रूरतों यानी basic needs के लिए ख़र्च करना चाहिए।
अब सवाल यह है कि बुनियादी ज़रूरतों को सही तरह से कैसे समझा जाए? तो जवाब होगा कि बुनियादी खर्चे वे हैं जो हमें सामान्य जीवन जीने के लिए अनिवार्य रूप से करने होते हैं। जैसे घर का राशन, घर का किराया, बिजली का बिल, पानी का बिल, फ़ोन बिल, मेडिकल दवाएँ, या अगर किसी तरह का लोन है तो उसकी किश्त, बच्चे की स्कूल फीस, आपके ऑफिस आने-जाने का ख़र्च और अन्य खर्चे जो आपको हर महीने कैसे भी करने ही होते हैं। ऐसे खर्चे जिन्हें आप रोक नहीं सकते। तो इस तरह के खर्चे को हम basic needs कहते हैं और अपनी इनकम का कुल 50% हिस्सा basic needs पर ख़र्च होना चाहिए।
इनकम का दूसरा हिस्सा, यानी 30% हिस्सा हमारी wants and wishes पर ख़र्च किया जाना चाहिए। अब सवाल यह है कि wants and wishes का क्या मतलब है? ये ऐसे खर्चे होते हैं जो आपके लिए अनिवार्य नहीं होते। आप इस तरह के खर्चे करें या ना करें, ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता है। Wants and wishes पर अक्सर लोग अपनी सामाजिक स्थिति (social status) दिखाने के लिए ख़र्च करते हैं। यही वह ख़र्च है जहाँ लोग शौक भी करते हैं और ख़ूब पार्टी भी करते हैं। आपको याद रखना है कि इस तरह के wants and wishes के खर्चे पर अपनी कमाई का 30% से ज़्यादा ख़र्च नहीं करना है।
Wants and wishes के कुछ उदाहरानो की बात की जाए तो इसमें शामिल होते हैं अख़बार बिल, TV बिल, घर का सामान, नया टीवी, नया मोबाइल, नए कपड़े, होटल का खाना, घूमने जाना, किचन का समान खरीदना, मूवी देखने जाना, पार्टी करना और अन्य चीज़ें।
नियम का आखिरी हिस्सा कहता है कि हमें अपनी आय का 20% हिस्सा saving और निवेश के लिए अलग रखना चाहिए। इस नियम के अनुसार 20% भले ही तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन आपको यह तीसरा काम सबसे पहले करना होता है। इसलिए जैसे ही आपको अपनी आय मिले, अपनी सैलरी मिले तो सबसे पहले अपनी इनकम का 20% हिस्सा अलग रखना है और इसे आपको भूल जाना है। इस 20% के हिस्से को बचत और निवेश के लिए ही रखना है, ताकि आप अपनी भविष्य की सभी ज़रूरतों को पूरा कर सकें। जैसे अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई, अपना घर खरीदन, बच्चों की शादी और अपनी रिटायर्मेंट का खर्चा।
ध्यान दीजिए आपको अपनी इनकम का 20% हिस्सा इसलिए अलग रखना होता है ताकि आप अपने भविष्य में लगने वाले सभी बड़े खर्चों को पूरा कर सकें बचत और निवेश के माध्यम से।
इसके अलावा किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी खोना आदि के लिए भी पैसों की बचत करनी ज़रूरी होती है। साथ ही किसी तरह का कर्ज़ होने पर इस हिस्से से सबसे पहले आपको क़र्ज़ चुकाने की योजना करनी चाहिए।
इसलिए इस 50 30 20 rule of money में आप को wants and wishes में सबसे कम ख़र्च करना चाहिए। दोस्तों, ध्यान दीजिए कि हम सब की आर्थिक परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग-अलग हैं और हमारी आय भी अलग-अलग है। कोई Rs. 10,000/- कमाता है, कोई Rs. 20,000/-, कोई Rs. 50,000/-, या कोई उससे भी अधिक। ऐसे में कोई एक नियम सभ पर लागू नहीं हो सकता। इसलिए ज़रूरी नहीं कि 50 30 20 का नियम आपके लिए सबसे श्रेष्ठ हो। लेकिन आप इस नियम को पासे मैनेज करने के एक तरीके के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और आप चाहें तो इसमें कुछ बदलाव भी कर सकते हैं।
आप चाहे तो 60/20/20 का नियम अपना सकते हैं, नहीं तो 40/40/20 अपना सकते हैं। इस लेख का मकसद यह है कि आपको एक आईडिया मिल जाए कि इस तरह के अनुपात में अपने खर्चों को बांटकर पैसे ख़र्च करने से हम लोगों का बैंक अकाउंट कभी भी खली नहीं रहेगा और-और महीने के आखिरी में पैसे की समस्या से हम बच सकते हैं।
तो इस लेख का सन्देश यह होगा कि पैसे को सही तरह से मैनेज करने के लिए 50 30 20 rule of money यह बताता है कि हमें अपने basic needs के ऊपर सबसे पहले ध्यान देना है और लगभग अपनी आय का 50% तक ख़र्च करना है। इसके बाद 20% बचत के लिए अलग रखना है और बाक़ी के 30% अपने शौक और इच्छाओं पर ख़र्च करना है।
हम आशा करते हैं कि इस लेख से आपको अपनी मेहनत के पैसे का सही ढंग से प्रबंध करने में कुछ ज़रूरी लाभ मिला होगा। यदि हाँ, तो इसे अपने मित्रो और परिजनों के साथ साझा करें।
धन्यवाद।
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| 50 30 20 rule of money | पैसे का 50 30 20 नियम {2021} |
महीने की शुरुआत में सैलरी मिलने के बाद पैसे आ जाते हैं और कुछ दिन तक सब ठीक रहता है। फिर जैसे-जैसे दिन निकलते हैं और महीने के आखरी 10 दिन बचते हैं, तब तक लगभग सारे पैसे ख़र्च हो चुके होते हैं। थोड़े पैसे जो बचत के नाम पर बैंक में रखे होते हैं, उन्हें भी महीने के आख़िर में ख़र्च कर ही दिया जाता है और इस तरह अगला वेतन मिलने से पहले हमारा पूरा बैंक अकाउंट लगभग खाली-सा हो जाता है।
दोस्तों, आपको क्या लगता है ऐसा क्यों होता है? क्या आपको ऐसा लगता है कि आपकी income कम है, इसलिए पैसे की समस्या हो रही है? तो इसका जवाब है ‘नहीं। कम income होना समस्या नहीं है, बल्कि पैसे को सही तरह से ख़र्च नहीं करना और पैसे का सही तरह से प्रबंधन (manage) नहीं कर पाना हमारे असली समस्याएँ हैं।
जैसे, मान लीजिए राम और श्याम दो दोस्त हैं। राम की आय Rs. 10,000/- है और श्याम की Rs. 50,000/-। फिर भी ना तो राम के पास पैसे बचते हैं और नहीं शाम के पास। अब इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब यह हुआ कि राम जिसकी सैलरी Rs. 10,000/- है, वह यह सोचेगा कि उसकी सैलरी अगर Rs. 20,000/- हो जाएगी तो पैसे की बचत कर पाएगा। जबकि हक़ीक़त में ऐसा नहीं होता। जैसे ही सैलरी बढ़ती है हमारे खर्चे भी बढ़ जाते हैं और इसलिए हमारी हालत वैसे की वैसे ही रह जाती है, और सैलरी बढ़ने के बावजूद कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता।
इसलिए हमारा मानना यह है कि महीने के आखिरी में पैसे की कमी, खाली purse और खाली बैंक अकाउंट की समस्या का सबसे बड़ा कारण होता है पैसे को ख़र्च करने की हमारी आदत। इसलिए यह सीखना बहुत ज़रूरी है कि हम पैसे को किस तरह से ख़र्च करें और पैसे को किस तरह से मैनेज करें।
पैसे manage करने के बहुत से तरीके हैं, लेकिन हम आपसे बहुत ही सिंपल और आसान तरीके के बारे में बात करेंगे जो आपको हमेशा याद रहेगा और हम आपको guarantee देते हैं कि ना तो आपका purse खाली रहेगा और ना ही आपका बैंक खता। पैसे को ख़र्च करने और बचत करने के इस तरीके का नाम है 50 30 20 Thumb rule. यानी पैसे को मैनेज करने का 50/30/ 20 का नियम।
पैसे को मैनेज करने के इस 50 30 20 नियम के बारे में सबसे पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक्सपर्ट एलिज़ाबेथ वारेन और उनकी पुत्री अमेलिया वारेन टेयागी ने अपनी किताब The ultimate lifetime money plan में ने बताया हुआ है। यह बहुत ही आसान-सा नियम है जो कोई भी इंसान अपनी कमाई और ख़र्च के ऊपर लागू कर सकता है और अपने पैसे की समस्या का समाधान कर सकता है।
इस नियम में 50, 30 और 20 एक अनुपात को दर्शाते हैं जो हमारी आय और ख़र्च के बीच में होना चाहिए। इस नियम के अनुसार आय को 50, 30 और 20 के अनुपात में हमें तीन हिस्सों में बांट कर पैसे ख़र्च करने होते हैं। जैसे पूरी आय का 50% हिस्सा बुनियादी ज़रूरतों (basic needs) के ऊपर ख़र्च होना चाहिए, जबकि आय का 30% हिस्सा चाहत और इच्छाओं (wants and wishes) पर और 20% हिस्सा बचत और निवेश (saving and investment) पर सबसे पहले अलग किया जाना चाहिए।
ध्यान दीजिए कि 50 30 20 के इस नियम में तीसरे हिस्से, यानी 20% को सबसे पहले अलग रखना होता है। यानी जैसे ही सैलरी मिलती है आप अपनी सुविधा के अनुसार कम से कम 10% या अधिकतम अपनी सुविधानुसार पैसे आपको बचत के लिए अलग खाते में रख देना चाहिए, जो आप सिर्फ़ निवेश और वित्तीय लक्ष्य (financial goal) को पूरा करने के लिए ही इस्तेमाल करेंगे। आप किसी भी हालत में इस 20% का इस्तेमाल नहीं करेंगे, बल्कि इसे बचत के लिए अलग रखेंगे।
आइये इस नियम के बारे में थोड़ा और विस्तार में बात करते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है। हर इंसान के पास 3 तरह के खर्चे होते हैं।
1. Basic needs– इसमें रोटी कपड़ा और मकान से सम्बंधित ख़र्च शामिल होते हैं।
2. Wants and wishes– जिसमें मनोरंजन, नए मोबाइल, टीवी, फर्नीचर, फैशनेबल कपड़े, घर की सजावट और कुछ विलासिता (luxury) वाले खर्चे भी आ जाते हैं।
3. Saving and investment– यह पैसों की बचत और निवेश करने की ज़रूरत को पूरा करता।
50/30/20 का नियम बिल्कुल आसान शब्दों में हमें यही बताता है कि हमें इन तीन तरह के खर्चों में किस तरह के खर्चे में कितने रुपए ख़र्च करने चाहिए। जैसा हमने पहले देखा इस नियम के अनुसार हमें अपनी कुल आय का 50% हिस्सा अपनी बुनियादी ज़रूरतों यानी basic needs के लिए ख़र्च करना चाहिए।
अब सवाल यह है कि बुनियादी ज़रूरतों को सही तरह से कैसे समझा जाए? तो जवाब होगा कि बुनियादी खर्चे वे हैं जो हमें सामान्य जीवन जीने के लिए अनिवार्य रूप से करने होते हैं। जैसे घर का राशन, घर का किराया, बिजली का बिल, पानी का बिल, फ़ोन बिल, मेडिकल दवाएँ, या अगर किसी तरह का लोन है तो उसकी किश्त, बच्चे की स्कूल फीस, आपके ऑफिस आने-जाने का ख़र्च और अन्य खर्चे जो आपको हर महीने कैसे भी करने ही होते हैं। ऐसे खर्चे जिन्हें आप रोक नहीं सकते। तो इस तरह के खर्चे को हम basic needs कहते हैं और अपनी इनकम का कुल 50% हिस्सा basic needs पर ख़र्च होना चाहिए।
इनकम का दूसरा हिस्सा, यानी 30% हिस्सा हमारी wants and wishes पर ख़र्च किया जाना चाहिए। अब सवाल यह है कि wants and wishes का क्या मतलब है? ये ऐसे खर्चे होते हैं जो आपके लिए अनिवार्य नहीं होते। आप इस तरह के खर्चे करें या ना करें, ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता है। Wants and wishes पर अक्सर लोग अपनी सामाजिक स्थिति (social status) दिखाने के लिए ख़र्च करते हैं। यही वह ख़र्च है जहाँ लोग शौक भी करते हैं और ख़ूब पार्टी भी करते हैं। आपको याद रखना है कि इस तरह के wants and wishes के खर्चे पर अपनी कमाई का 30% से ज़्यादा ख़र्च नहीं करना है।
Wants and wishes के कुछ उदाहरानो की बात की जाए तो इसमें शामिल होते हैं अख़बार बिल, TV बिल, घर का सामान, नया टीवी, नया मोबाइल, नए कपड़े, होटल का खाना, घूमने जाना, किचन का समान खरीदना, मूवी देखने जाना, पार्टी करना और अन्य चीज़ें।
नियम का आखिरी हिस्सा कहता है कि हमें अपनी आय का 20% हिस्सा saving और निवेश के लिए अलग रखना चाहिए। इस नियम के अनुसार 20% भले ही तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन आपको यह तीसरा काम सबसे पहले करना होता है। इसलिए जैसे ही आपको अपनी आय मिले, अपनी सैलरी मिले तो सबसे पहले अपनी इनकम का 20% हिस्सा अलग रखना है और इसे आपको भूल जाना है। इस 20% के हिस्से को बचत और निवेश के लिए ही रखना है, ताकि आप अपनी भविष्य की सभी ज़रूरतों को पूरा कर सकें। जैसे अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई, अपना घर खरीदन, बच्चों की शादी और अपनी रिटायर्मेंट का खर्चा।
ध्यान दीजिए आपको अपनी इनकम का 20% हिस्सा इसलिए अलग रखना होता है ताकि आप अपने भविष्य में लगने वाले सभी बड़े खर्चों को पूरा कर सकें बचत और निवेश के माध्यम से।
इसके अलावा किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी खोना आदि के लिए भी पैसों की बचत करनी ज़रूरी होती है। साथ ही किसी तरह का कर्ज़ होने पर इस हिस्से से सबसे पहले आपको क़र्ज़ चुकाने की योजना करनी चाहिए।
इसलिए इस 50 30 20 rule of money में आप को wants and wishes में सबसे कम ख़र्च करना चाहिए। दोस्तों, ध्यान दीजिए कि हम सब की आर्थिक परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग-अलग हैं और हमारी आय भी अलग-अलग है। कोई Rs. 10,000/- कमाता है, कोई Rs. 20,000/-, कोई Rs. 50,000/-, या कोई उससे भी अधिक। ऐसे में कोई एक नियम सभ पर लागू नहीं हो सकता। इसलिए ज़रूरी नहीं कि 50 30 20 का नियम आपके लिए सबसे श्रेष्ठ हो। लेकिन आप इस नियम को पासे मैनेज करने के एक तरीके के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और आप चाहें तो इसमें कुछ बदलाव भी कर सकते हैं।
आप चाहे तो 60/20/20 का नियम अपना सकते हैं, नहीं तो 40/40/20 अपना सकते हैं। इस लेख का मकसद यह है कि आपको एक आईडिया मिल जाए कि इस तरह के अनुपात में अपने खर्चों को बांटकर पैसे ख़र्च करने से हम लोगों का बैंक अकाउंट कभी भी खली नहीं रहेगा और-और महीने के आखिरी में पैसे की समस्या से हम बच सकते हैं।
तो इस लेख का सन्देश यह होगा कि पैसे को सही तरह से मैनेज करने के लिए 50 30 20 rule of money यह बताता है कि हमें अपने basic needs के ऊपर सबसे पहले ध्यान देना है और लगभग अपनी आय का 50% तक ख़र्च करना है। इसके बाद 20% बचत के लिए अलग रखना है और बाक़ी के 30% अपने शौक और इच्छाओं पर ख़र्च करना है।
हम आशा करते हैं कि इस लेख से आपको अपनी मेहनत के पैसे का सही ढंग से प्रबंध करने में कुछ ज़रूरी लाभ मिला होगा। यदि हाँ, तो इसे अपने मित्रो और परिजनों के साथ साझा करें।
धन्यवाद।

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